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UP Board का रिजल्ट और NEET की एलिजिबिलिटी, मेडिकल के एडमिशन में असल में क्या ज़रूरी है

Published on Jul 23, 2026 · 1 min read · 2 views
UP Board का रिजल्ट और NEET की एलिजिबिलिटी, मेडिकल के एडमिशन में असल में क्या ज़रूरी है

UP Board का रिजल्ट और NEET की एलिजिबिलिटी, मेडिकल के एडमिशन में असल में क्या ज़रूरी है

UP Board के कई छात्र यह मानकर घबरा जाते हैं कि 12वीं में नंबर कम रह गए तो मेडिकल की राह बंद हो गई। ऐसा कुछ नहीं है। असलियत यह है कि MBBS में एडमिशन केवल NEET के नंबरों और रैंक से मिलता है, और बोर्ड का रिजल्ट सिर्फ एक शर्त पूरी करने के लिए देखा जाता है। इस लेख में सीधे शब्दों में बताया गया है कि बोर्ड का रिजल्ट कहाँ ज़रूरी है और कहाँ इसका कोई असर नहीं।

सबसे बड़ी गलतफहमी, क्या बोर्ड के नंबर NEET की रैंक बदल देते हैं

जवाब है नहीं। यह बात ठीक से समझ लेना ज़रूरी है, क्योंकि इसी पर बहुत सारे छात्र बेकार में परेशान होते हैं।

  • बोर्ड के नंबर NEET के 720 नंबरों में नहीं जोड़े जाते। स्कोर सिर्फ NEET के पेपर से बनता है।
  • रैंक पर इनका कोई असर नहीं होता। मेरिट लिस्ट केवल NEET के नंबरों से बनती है।
  • बराबरी की हालत में भी ये नहीं देखे जाते। NEET नंबर बराबर होने पर पहले बायोलॉजी, फिर केमिस्ट्री, फिर फिज़िक्स के नंबर देखे जाते हैं, उसके बाद यह देखा जाता है कि किसके गलत जवाब कम हैं। बोर्ड के नंबर इसमें शामिल ही नहीं हैं।
  • मतलब साफ है, 95 प्रतिशत वाले और 60 प्रतिशत वाले छात्र का NEET स्कोर बराबर हो तो दोनों बराबर माने जाएँगे।

फिर UP Board का रिजल्ट किसलिए ज़रूरी है, एलिजिबिलिटी के नियम

बोर्ड का रिजल्ट केवल यह तय करता है कि आप NEET और एडमिशन के लिए एलिजिबल हैं या नहीं। इसके लिए ये नियम पूरे होने चाहिए।

  • सब्जेक्ट: 12वीं में फिज़िक्स, केमिस्ट्री, बायोलॉजी या बायोटेक्नोलॉजी और अंग्रेज़ी होनी चाहिए, और इन सबमें पास होना ज़रूरी है।
  • कम से कम नंबर: फिज़िक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी तीनों को जोड़कर जनरल कैटेगरी के लिए 50 प्रतिशत, SC, ST और OBC के लिए 40 प्रतिशत, तथा जनरल कैटेगरी के दिव्यांग छात्रों के लिए 45 प्रतिशत।
  • खास बात: यह प्रतिशत केवल इन्हीं तीन सब्जेक्ट का निकाला जाता है, कुल प्रतिशत या गणित के नंबर इसमें नहीं गिने जाते।
  • अंग्रेज़ी: पास होना ज़रूरी है, मगर इसके नंबर उस प्रतिशत में नहीं जुड़ते।
  • उम्र: कम से कम 17 साल होनी चाहिए। ऊपर की उम्र की कोई सीमा नहीं रखी गई है।
  • कितने मौके: NEET देने की संख्या पर कोई रोक नहीं है, इसलिए ड्रॉपर भी पूरी तरह एलिजिबल हैं।

एक और बात साफ रखें। यह 50 और 40 प्रतिशत वाला नियम 12वीं के नंबरों से जुड़ा है। NEET में अलग से पास होने के लिए कट ऑफ पर्सेंटाइल भी पार करनी पड़ती है, जो जनरल कैटेगरी के लिए 50, SC, ST और OBC के लिए 40 तथा दिव्यांग छात्रों के लिए 45 पर्सेंटाइल होती है। दोनों बातें अलग अलग हैं।

वे सवाल जिनमें UP Board के छात्र अक्सर उलझते हैं

  • 12वीं में बैठे हैं और रिजल्ट बाकी है: NEET का फॉर्म भर सकते हैं, पर काउंसलिंग के पहले राउंड तक 12वीं पास होना ज़रूरी है।
  • किसी सब्जेक्ट में कंपार्टमेंट आई है: काउंसलिंग से पहले उसे पास कर लेने पर एडमिशन मिल सकता है।
  • नंबर शर्त से कम रह गए: इंप्रूवमेंट एग्ज़ाम से नंबर बढ़ाए जा सकते हैं, पर पक्का नियम NTA के उस साल के इनफॉर्मेशन बुलेटिन से मिला लें।
  • बायोलॉजी एडिशनल सब्जेक्ट के रूप में पढ़ी: यह चलती है, NMC ने इसकी छूट दी है।
  • कई साल पहले 12वीं पास की: कोई रोक नहीं, पुराने साल वाले भी एलिजिबल हैं।

यहाँ आपका राज्य ज़रूरी हो जाता है, UP का स्टेट कोटा

मेडिकल की सीटें दो भागों में बँटी होती हैं। 15 प्रतिशत सीटें ऑल इंडिया कोटा की होती हैं, जिनकी काउंसलिंग MCC कराता है और जिनमें राज्य की कोई शर्त नहीं होती। बाकी 85 प्रतिशत सीटें स्टेट कोटा की होती हैं, जिनकी काउंसलिंग उत्तर प्रदेश में DGME कराता है।

  • यूपी से पढ़ाई: जिन छात्रों ने 10वीं और 12वीं उत्तर प्रदेश के स्कूलों से पास की है, वे आमतौर पर स्टेट कोटा के लिए एलिजिबल माने जाते हैं।
  • या डोमिसाइल सर्टिफिकेट: बाहर से पढ़ाई की हो तो उत्तर प्रदेश का डोमिसाइल सर्टिफिकेट चाहिए और माता या पिता का उत्तर प्रदेश का परमानेंट रेजिडेंट होना ज़रूरी है।
  • बाहरी छात्र: जो स्टेट कोटा में नहीं आते, वे ऑल इंडिया कोटा और प्राइवेट कॉलेजों की सीटों पर मौका पा सकते हैं।

यानी आपका राज्य और वहाँ की पढ़ाई एडमिशन पर असर डालती है, पर बोर्ड के नंबर नहीं। काउंसलिंग के नियम हर साल बदल सकते हैं, इसलिए DGME की वेबसाइट से ताज़ा जानकारी ज़रूर देखें।

एडमिशन में असल में किन बातों से फर्क पड़ता है

  • सबसे पहले NEET का स्कोर और रैंक, यही सबसे बड़ी बात है।
  • NEET की कट ऑफ पर्सेंटाइल पार करना।
  • आपकी कैटेगरी और रिज़र्वेशन।
  • डोमिसाइल और स्टेट कोटा।
  • काउंसलिंग में समझदारी से कॉलेज चुनना।
  • 12वीं की कम से कम शर्त पूरी होना और डॉक्यूमेंट का सही होना।

काउंसलिंग के समय NEET का स्कोर कार्ड, 10वीं का सर्टिफिकेट, 12वीं की मार्कशीट, कैटेगरी सर्टिफिकेट और डोमिसाइल सर्टिफिकेट जैसे डॉक्यूमेंट माँगे जाते हैं, इसलिए इन्हें पहले से जुटा लें।

एक ज़रूरी बात

नंबर शर्त से ऊपर हों तो और नंबर बटोरने के पीछे भागने की ज़रूरत नहीं, फिर भी बोर्ड को हल्के में मत लीजिए। तीन कारण हैं, पहला यह कि सिलेबस वही NCERT वाला है जो NEET में पूछा जाता है, दूसरा यह कि कम से कम नंबर की शर्त तो पूरी करनी ही है, और तीसरा यह कि NEET में मनचाहा नतीजा न मिले तो अच्छा बोर्ड रिजल्ट आगे काम आता है। यह भी ध्यान रखें कि बोर्ड के नंबरों को NEET में जोड़ने की चर्चा अभी सिर्फ एक सुझाव है, नियम नहीं। NEET 2027 के पक्के नियम NTA का इनफॉर्मेशन बुलेटिन आने पर ही तय होंगे।

अरिविहान आपकी कैसे मदद करता है

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FAQs

यह आर्टिकल जुलाई 2026 तक उपलब्ध जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। NEET 2027 की एलिजिबिलिटी, पैटर्न और काउंसलिंग के नियम NTA, NMC तथा राज्य के काउंसलिंग बोर्ड के आधिकारिक नोटिफिकेशन से तय होंगे और इनमें बदलाव हो सकता है, इसलिए फॉर्म भरने से पहले nta.ac.in, neet.nta.nic.in, nmc.org.in, mcc.nic.in और upneet.gov.in पर ताज़ा जानकारी ज़रूर देख लें।

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