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RBSE का रिजल्ट और NEET की एलिजिबिलिटी, मेडिकल के एडमिशन में सचमुच क्या काम आता है

Published on Jul 23, 2026 · 1 min read · 2 views
RBSE का रिजल्ट और NEET की एलिजिबिलिटी, मेडिकल के एडमिशन में सचमुच क्या काम आता है

RBSE का रिजल्ट और NEET की एलिजिबिलिटी, मेडिकल के एडमिशन में सचमुच क्या काम आता है

Rajasthan Board के बहुत से छात्रों के मन में यह डर बैठा रहता है कि 12वीं में नंबर कम आ गए तो डॉक्टर बनने का रास्ता बंद हो जाएगा। यह डर बेवजह है। असल बात यह है कि MBBS में एडमिशन सिर्फ NEET के नंबर और रैंक से होता है, और बोर्ड का रिजल्ट केवल एक शर्त पूरी करने के लिए देखा जाता है। इस लेख में खुलकर बताया गया है कि बोर्ड का रिजल्ट कहाँ काम आता है और कहाँ इसका कोई हाथ नहीं होता।

सबसे आम गलतफहमी, क्या बोर्ड के नंबर NEET की रैंक पर असर डालते हैं

जवाब है बिल्कुल नहीं। इस बात को ठीक से जान लीजिए, क्योंकि यहीं पर ज़्यादातर छात्र बेकार का बोझ उठा लेते हैं।

  • बोर्ड के नंबर NEET के 720 नंबरों में नहीं जुड़ते। स्कोर केवल NEET के पेपर से बनता है।
  • रैंक पर इनका कोई असर नहीं पड़ता। मेरिट लिस्ट सिर्फ NEET के नंबरों से बनती है।
  • बराबरी होने पर भी इन्हें नहीं देखा जाता। NEET नंबर बराबर हों तो पहले बायोलॉजी, फिर केमिस्ट्री, फिर फिज़िक्स के नंबर देखे जाते हैं, उसके बाद यह देखा जाता है कि किसके गलत जवाब कम हैं। बोर्ड के नंबर इस लिस्ट में हैं ही नहीं।
  • सीधी बात यह है कि 95 प्रतिशत वाले और 60 प्रतिशत वाले छात्र का NEET स्कोर एक जैसा हो तो दोनों को एक जैसा माना जाएगा।

तो RBSE का रिजल्ट किस बात के लिए देखा जाता है, एलिजिबिलिटी की शर्तें

बोर्ड का रिजल्ट बस इतना तय करता है कि आप NEET और एडमिशन के लिए एलिजिबल हैं या नहीं। इसके लिए ये शर्तें पूरी होनी चाहिए।

  • सब्जेक्ट: 12वीं में फिज़िक्स, केमिस्ट्री, बायोलॉजी या बायोटेक्नोलॉजी और अंग्रेज़ी होनी चाहिए, और इन सबमें पास होना ज़रूरी है।
  • कम से कम नंबर: फिज़िक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी तीनों को मिलाकर जनरल कैटेगरी के लिए 50 प्रतिशत, SC, ST और OBC के लिए 40 प्रतिशत, तथा जनरल कैटेगरी के दिव्यांग छात्रों के लिए 45 प्रतिशत।
  • याद रखने की बात: यह प्रतिशत सिर्फ इन तीन सब्जेक्ट का बनता है, आपका कुल प्रतिशत या गणित के नंबर इसमें नहीं जोड़े जाते।
  • अंग्रेज़ी: इसमें पास होना ज़रूरी है, पर इसके नंबर उस प्रतिशत में नहीं गिने जाते।
  • उम्र: कम से कम 17 साल होनी चाहिए। ऊपर की उम्र पर कोई रोक नहीं है।
  • कितनी बार: NEET देने की गिनती पर कोई सीमा नहीं है, इसलिए ड्रॉपर भी पूरी तरह एलिजिबल हैं।

एक बात और साफ रखें। यह 50 और 40 प्रतिशत वाली शर्त 12वीं के नंबरों से जुड़ी है। NEET में अलग से पास होने के लिए कट ऑफ पर्सेंटाइल भी पार करनी होती है, जो जनरल कैटेगरी के लिए 50, SC, ST और OBC के लिए 40 तथा दिव्यांग छात्रों के लिए 45 पर्सेंटाइल है। ये दोनों अलग अलग चीज़ें हैं।

वे सवाल जो RBSE के छात्र सबसे ज़्यादा पूछते हैं

  • 12वीं दे रहे हैं और रिजल्ट नहीं आया: NEET का फॉर्म भर सकते हैं, मगर काउंसलिंग के पहले राउंड तक 12वीं पास होना ज़रूरी है।
  • किसी सब्जेक्ट में कंपार्टमेंट आ गई: काउंसलिंग से पहले उसे पास कर लें, तब एडमिशन हो सकता है।
  • नंबर शर्त से नीचे रह गए: इंप्रूवमेंट एग्ज़ाम देकर नंबर बढ़ाए जा सकते हैं, पर पक्का नियम NTA के उस साल के इनफॉर्मेशन बुलेटिन से मिला लें।
  • बायोलॉजी एडिशनल सब्जेक्ट के तौर पर ली: यह चलती है, NMC ने इसकी छूट दी है।
  • बहुत पहले 12वीं पास की: कोई रुकावट नहीं, पुराने साल वाले भी एलिजिबल हैं।

यहाँ आपका राज्य काम आता है, राजस्थान का स्टेट कोटा

मेडिकल की सीटें दो हिस्सों में बँटती हैं। 15 प्रतिशत सीटें ऑल इंडिया कोटा की होती हैं, जिनकी काउंसलिंग MCC करता है और जिनमें किसी राज्य की शर्त नहीं होती। बाकी 85 प्रतिशत सीटें स्टेट कोटा की होती हैं, जिनकी काउंसलिंग राजस्थान में NEET UG काउंसलिंग बोर्ड करता है।

  • डोमिसाइल सर्टिफिकेट ज़रूरी: राजस्थान की 85 प्रतिशत सरकारी सीटों के लिए राजस्थान का डोमिसाइल सर्टिफिकेट होना चाहिए।
  • बाहरी छात्र: जो स्टेट कोटा में नहीं आते, उनके लिए ऑल इंडिया कोटा, प्राइवेट कॉलेज और बाद के राउंड की खाली सीटें रास्ता खोलती हैं।
  • डॉक्यूमेंट पहले से तैयार रखें: डोमिसाइल और कैटेगरी सर्टिफिकेट बनवाने में समय लगता है, इसलिए काउंसलिंग से पहले ही बनवा लें।

यानी आपका राज्य और डोमिसाइल एडमिशन पर असर डालते हैं, पर बोर्ड के नंबर नहीं। काउंसलिंग के नियम हर साल बदल सकते हैं, इसलिए राजस्थान की काउंसलिंग वेबसाइट से ताज़ा जानकारी ज़रूर देखें।

एडमिशन में सचमुच किन बातों का हाथ होता है

  • सबसे पहले NEET का स्कोर और रैंक, यही सब कुछ तय करता है।
  • NEET की कट ऑफ पर्सेंटाइल पार करना।
  • आपकी कैटेगरी और रिज़र्वेशन।
  • डोमिसाइल और स्टेट कोटा।
  • काउंसलिंग में सोच समझकर कॉलेज भरना।
  • 12वीं की कम से कम शर्त पूरी होना और डॉक्यूमेंट का सही होना।

काउंसलिंग के वक्त NEET का स्कोर कार्ड, 10वीं का सर्टिफिकेट, 12वीं की मार्कशीट, कैटेगरी सर्टिफिकेट और डोमिसाइल सर्टिफिकेट जैसे डॉक्यूमेंट लगते हैं, इसलिए इन्हें पहले से संभालकर रखें।

एक ज़रूरी बात

नंबर शर्त से ऊपर हों तो और नंबरों के पीछे दौड़ने की ज़रूरत नहीं, फिर भी बोर्ड को हल्के में न लें। तीन वजहें हैं, पहली यह कि सिलेबस वही NCERT वाला है जो NEET में आता है, दूसरी यह कि कम से कम नंबर की शर्त तो पूरी करनी ही होगी, और तीसरी यह कि NEET में मनचाहा नतीजा न मिले तो अच्छा बोर्ड रिजल्ट आगे सहारा बनता है। यह भी जान लें कि बोर्ड के नंबरों को NEET में जोड़ने की बात अभी केवल एक सुझाव है, नियम नहीं। NEET 2027 के पक्के नियम NTA का इनफॉर्मेशन बुलेटिन आने पर ही तय होंगे।

अरिविहान आपकी कैसे मदद करता है

अरिविहान पर साफ हिंदी में RBSE 12वीं और NEET, दोनों के लिए फिज़िक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी के चैप्टर वाइज़ वीडियो, NCERT आधारित नोट्स और हल किए गए सवाल मिलते हैं। एक ही पाठ से बोर्ड की तैयारी भी हो जाती है और NEET की भी, और कंप्यूटर पर मॉक टेस्ट देकर आप नए CBT मोड की आदत भी बना सकते हैं। पूरी लगन से पढ़िए और डॉक्टर बनने का सपना साकार कीजिए!


FAQs

यह आर्टिकल जुलाई 2026 तक उपलब्ध जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। NEET 2027 की एलिजिबिलिटी, पैटर्न और काउंसलिंग के नियम NTA, NMC तथा राज्य के काउंसलिंग बोर्ड के आधिकारिक नोटिफिकेशन से तय होंगे और इनमें बदलाव हो सकता है, इसलिए फॉर्म भरने से पहले nta.ac.in, neet.nta.nic.in, nmc.org.in और mcc.nic.in पर ताज़ा जानकारी ज़रूर जाँच लें।

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