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NEET के लिए मानव शरीर क्रिया विज्ञान, सबसे ज़्यादा वेटेज वाली यूनिट, चैप्टर दर चैप्टर

Published on Aug 05, 2026 · 1 min read · 3 views
NEET के लिए मानव शरीर क्रिया विज्ञान, सबसे ज़्यादा वेटेज वाली यूनिट, चैप्टर दर चैप्टर

NEET के लिए मानव शरीर क्रिया विज्ञान, सबसे ज़्यादा वेटेज वाली यूनिट चैप्टर दर चैप्टर

अगर बायोलॉजी में किसी एक यूनिट पर सबसे ज़्यादा मेहनत करनी हो, तो वह है मानव शरीर क्रिया विज्ञान (Human Physiology)। पिछले सालों के पेपर के विश्लेषण बताते हैं कि यहाँ से करीब 8 से 10 सवाल आते हैं, यानी बायोलॉजी का करीब पाँचवाँ हिस्सा। इसकी सबसे अच्छी बात यह है कि इसके ज़्यादातर सवाल सीधे NCERT की लाइनों, चित्रों और टेबल से बनते हैं। इस आर्टिकल में इस पूरी यूनिट को चैप्टर दर चैप्टर समझाया गया है, साथ में वे ज़रूरी आँकड़े भी जो याद रखने ही पड़ते हैं। ध्यान रहे, NTA आधिकारिक वेटेज जारी नहीं करता, ये आँकड़े पिछले पेपर के विश्लेषण पर आधारित अंदाज़ हैं।

पहले यह जान लीजिए, कौन सा चैप्टर हट चुका है

यह सबसे ज़रूरी बात है। नई (रेशनलाइज़्ड) NCERT से पाचन और अवशोषण (Digestion and Absorption) वाला चैप्टर हटा दिया गया है, और यह अब NEET के सिलेबस में भी नहीं है। इसे बिल्कुल न पढ़ें। इसी तरह न्यूरल कंट्रोल में रिफ्लेक्स आर्क और ज्ञानेंद्रियों (आँख तथा कान) का हिस्सा भी काफी घटा दिया गया है। बाकी बचे चैप्टर पूरी तरह पढ़ने हैं।

श्वसन और गैसों का विनिमय (Breathing and Exchange of Gases)

  • ज़रूरी टॉपिक: साँस लेने की क्रिया, फेफड़ों के आयतन और क्षमताएँ, ऑक्सीजन तथा कार्बन डाइऑक्साइड का परिवहन।
  • याद रखने वाले आँकड़े: टाइडल वॉल्यूम 500 mL, वाइटल कैपेसिटी करीब 3500 से 4500 mL, और कुल फेफड़ा क्षमता करीब 6000 mL।
  • ऑक्सीजन डिसोसिएशन कर्व: यह S आकार का होता है। CO2, तापमान या H+ बढ़ने पर यह दाईं ओर खिसकता है, जिसे बोर इफेक्ट कहते हैं, और तब ऊतकों में ऑक्सीजन आसानी से छूटती है।
  • CO2 का परिवहन: करीब 70 प्रतिशत बाइकार्बोनेट के रूप में, करीब 20 से 25 प्रतिशत हीमोग्लोबिन के साथ, और करीब 7 प्रतिशत घुली हुई अवस्था में।
  • आम गलती: वॉल्यूम और कैपेसिटी को आपस में मिला देना, और कर्व किस ओर खिसकेगा यह उलट देना।

शरीर द्रव तथा परिसंचरण (Body Fluids and Circulation)

  • ज़रूरी टॉपिक: रक्त की संरचना, ब्लड ग्रुप, रक्त का थक्का जमना, हृदय की संरचना, कार्डिएक साइकिल और ECG।
  • याद रखने वाले आँकड़े: कार्डिएक आउटपुट 5 लीटर प्रति मिनट (हृदय दर 70 गुणा स्ट्रोक वॉल्यूम करीब 70 mL), और सामान्य रक्तचाप 120 बटा 80 mmHg।
  • ECG: P तरंग का मतलब अलिंद का विध्रुवण, QRS का मतलब निलय का विध्रुवण, और T का मतलब निलय का पुनर्ध्रुवण। यह लगभग हर साल पूछा जाता है।
  • ब्लड ग्रुप: O सर्वदाता (universal donor) और AB सर्वग्राही (universal recipient)। Rh असंगति से एरिथ्रोब्लास्टोसिस फीटैलिस होता है।
  • चित्र: हृदय की काट और ECG का ग्राफ, दोनों बनाकर याद करें।

उत्सर्जी पदार्थ एवं उनका निष्कासन (Excretory Products and their Elimination)

  • ज़रूरी टॉपिक: नेफ्रॉन की संरचना, मूत्र बनने की प्रक्रिया, और काउंटर करंट मैकेनिज्म।
  • याद रखने वाला आँकड़ा: GFR यानी 125 mL प्रति मिनट, जो दिन भर में करीब 180 लीटर बनता है।
  • काउंटर करंट मैकेनिज्म: हेनले लूप और वासा रेक्टा मिलकर मेडुला में सांद्रता का ढाल बनाते हैं, जिससे गाढ़ा मूत्र बन पाता है।
  • हार्मोन: ADH, एल्डोस्टेरोन और ANF का काम, तथा रेनिन एंजियोटेंसिन तंत्र।
  • आम गलती: यह भूल जाना कि सबसे ज़्यादा पुनरावशोषण PCT में होता है और आरोही भुजा पानी के लिए अभेद्य होती है।

गमन एवं संचलन (Locomotion and Movement)

  • सार्कोमियर की संरचना: A बैंड, I बैंड, H ज़ोन, Z रेखा और M रेखा।
  • सिकुड़न का सिद्धांत (Sliding Filament Theory): ऐक्टिन, मायोसिन पर सरकता है। सिकुड़ने पर सार्कोमियर, I बैंड और H ज़ोन छोटे होते हैं, पर A बैंड की लंबाई नहीं बदलती, यह सबसे ज़्यादा पूछा जाने वाला बिंदु है।
  • आँकड़ा: शरीर में कुल 206 हड्डियाँ, जिनमें अक्षीय 80 और अनुबंधी 126।
  • रोग: मायस्थीनिया ग्रेविस, टिटेनी, मस्कुलर डिस्ट्रॉफी, आर्थराइटिस, ऑस्टियोपोरोसिस और गाउट।

तंत्रिकीय नियंत्रण एवं समन्वय (Neural Control and Coordination)

  • न्यूरॉन की संरचना और सिनैप्स (विद्युत तथा रासायनिक)।
  • याद रखने वाला आँकड़ा: विश्राम अवस्था की झिल्ली विभव माइनस 70 mV।
  • क्रिया विभव: सोडियम और पोटैशियम के आने जाने से विध्रुवण तथा पुनर्ध्रुवण।
  • मस्तिष्क के भाग: प्रमस्तिष्क, अनुमस्तिष्क, मेडुला, हाइपोथैलेमस, थैलेमस और पॉन्स, और हर एक का काम।
  • आम गलती: मस्तिष्क के किस भाग का क्या काम है, यह आपस में मिला देना।

रासायनिक समन्वय तथा एकीकरण (Chemical Coordination and Integration)

यह चैप्टर टेबल से भरा है और यहीं से सबसे ज़्यादा सीधे सवाल बनते हैं। हार्मोन, उसकी ग्रंथि और उसकी कमी या अधिकता से होने वाला रोग, यह तीनों एक साथ याद करें।

  • पीयूष ग्रंथि, GH: ज़्यादा होने पर बच्चों में जाइगैंटिज्म और बड़ों में एक्रोमेगाली, कम होने पर बौनापन।
  • ADH की कमी: डायबिटीज इन्सिपिडस।
  • थायरॉइड: आयोडीन की कमी से घेंघा (goitre), शिशुओं में क्रेटिनिज्म, और अधिकता से ग्रेव्स रोग।
  • पैराथायरॉइड (PTH) की कमी: टिटेनी। यह रक्त में कैल्शियम बढ़ाता है।
  • अग्न्याशय, इंसुलिन की कमी: डायबिटीज मेलाइटस। ग्लूकागॉन शर्करा बढ़ाता है।
  • अधिवृक्क वल्कुट की कमी: एडिसन रोग। अधिवृक्क मध्यांश से एड्रिनैलिन, जो संकट के समय काम आता है।

इस यूनिट को पढ़ने का सही तरीका

  • एक एक तंत्र करके पढ़ें, सब कुछ एक साथ मिलाकर नहीं।
  • चित्र बनाकर याद करें: हृदय, नेफ्रॉन, न्यूरॉन और सार्कोमियर, ये चारों बार बार बनाएँ।
  • फ्लोचार्ट बनाएँ: मूत्र बनने की प्रक्रिया और कार्डिएक साइकिल जैसे क्रम फ्लोचार्ट में अच्छे याद रहते हैं।
  • हार्मोन की एक टेबल बनाकर हर हफ्ते दोहराएँ।
  • NCERT लाइन दर लाइन पढ़ें और पिछले सालों के सवाल हल करें।

एक ज़रूरी बात

इस यूनिट में सबसे बड़ी गलती है सिर्फ पढ़ लेना और चित्र तथा आँकड़े छोड़ देना। NEET में यहाँ से चित्र के लेबल, सामान्य मान और छोटे छोटे अपवाद सीधे पूछे जाते हैं, इसलिए इन्हें अलग से लिखकर बार बार दोहराएँ। दूसरी ज़रूरी बात, पुरानी किताब से पाचन और अवशोषण वाला चैप्टर पढ़ने में समय बर्बाद न करें, वह अब सिलेबस में नहीं है।

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FAQs

यह आर्टिकल जुलाई 2026 तक उपलब्ध जानकारी, नई (रेशनलाइज़्ड) NCERT और पिछले सालों के NEET पेपर के विश्लेषण पर आधारित है। यहाँ दिया गया वेटेज अंदाज़न है, NTA इसे आधिकारिक रूप से जारी नहीं करता। सिलेबस और हटाए गए चैप्टर की पक्की जानकारी के लिए nta.ac.in, neet.nta.nic.in, nmc.org.in और ncert.nic.in पर ज़रूर जाँच लें।

Tags: RBSE MPBSE UPMSP NEET

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