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पारिस्थितिकी और पर्यावरण, आसान नंबर जिनकी तैयारी ज़्यादातर स्टूडेंट कम करते हैं

Published on Aug 05, 2026 · 1 min read · 4 views
पारिस्थितिकी और पर्यावरण, आसान नंबर जिनकी तैयारी ज़्यादातर स्टूडेंट कम करते हैं

पारिस्थितिकी और पर्यावरण, आसान नंबर जिनकी तैयारी ज़्यादातर स्टूडेंट कम करते हैं

पारिस्थितिकी (Ecology) NEET की सबसे आसान और सबसे फायदेमंद यूनिट में से एक है, फिर भी ज़्यादातर स्टूडेंट इसे आखिर के लिए छोड़ देते हैं और आधी अधूरी तैयारी के साथ परीक्षा में चले जाते हैं। यही सबसे बड़ी चूक है। इसके ज़्यादातर सवाल सीधे NCERT से आते हैं, इसमें गिनती के कॉन्सेप्ट हैं, और इसे दोहराने में समय भी कम लगता है। पिछले सालों के विश्लेषण के हिसाब से यहाँ से करीब 8 से 12 सवाल तक आते रहे हैं, और हाल के पेपर में यह संख्या ऊपर की ओर रही है। यानी थोड़ी सी मेहनत में यहाँ पक्के नंबर मिलते हैं।

पहले यह जान लीजिए, कौन सा चैप्टर हट चुका है

नई (रेशनलाइज़्ड) NCERT से पर्यावरणीय मुद्दे (Environmental Issues) वाला पूरा चैप्टर हटा दिया गया है और यह NEET के सिलेबस में भी नहीं है, इसलिए इसे न पढ़ें। अब इस यूनिट में तीन चैप्टर रह गए हैं, जीव और समष्टियाँ, पारितंत्र, तथा जैव विविधता एवं संरक्षण। एक बात ईमानदारी से जान लें, पोषक चक्र (कार्बन तथा फॉस्फोरस) और पारिस्थितिक अनुक्रमण नई NCERT की किताब से हटा दिए गए हैं, हालाँकि NTA के सिलेबस की सूची में ये अब भी दिखते हैं। इसलिए इनकी बुनियादी जानकारी रखें, पर मेहनत उसी पर लगाएँ जो मौजूदा NCERT में है।

जीव और समष्टियाँ (Organisms and Populations)

  • समष्टि के गुण: घनत्व, जन्म दर, मृत्यु दर, लिंग अनुपात और आयु पिरामिड।
  • वृद्धि के दो मॉडल: चरघातांकी वृद्धि (exponential), जो J आकार की होती है, और लॉजिस्टिक वृद्धि, जो S आकार की होती है और जिसमें पोषण क्षमता (K) की सीमा होती है।
  • सहजीविता (mutualism), दोनों को फायदा: लाइकेन, माइकोराइज़ा, अंजीर और ततैया।
  • सहभोजिता (commensalism), एक को फायदा दूसरे को कुछ नहीं: पेड़ पर ऑर्किड, व्हेल पर बार्नेकल, और चरते पशुओं के साथ बगुला।
  • परजीविता और परभक्षण: कोयल का कौवे के घोंसले में अंडे देना (ब्रूड पैरासिटिज्म), और कीस्टोन परभक्षी का उदाहरण।
  • स्पर्धा: गॉज का स्पर्धी अपवर्जन सिद्धांत, और संसाधनों का बँटवारा।
  • अनुकूलन: कंगारू चूहा, ऊँट, CAM पौधे और ऊँचाई पर शरीर का ढलना।

हर अंतर्क्रिया का कम से कम एक उदाहरण ज़रूर याद रखें, क्योंकि सवाल अक्सर उदाहरण से ही पूछा जाता है।

पारितंत्र (Ecosystem)

  • उत्पादकता: सकल प्राथमिक उत्पादकता (GPP), शुद्ध प्राथमिक उत्पादकता (NPP बराबर GPP घटा श्वसन), और द्वितीयक उत्पादकता।
  • अपघटन की क्रियाएँ: खंडन, निक्षालन, अपचयन, ह्यूमस बनना और खनिजीकरण।
  • ऊर्जा प्रवाह: दस प्रतिशत का नियम, और ऊर्जा हमेशा एक ही दिशा में बहती है।
  • पारिस्थितिक पिरामिड: यह सबसे ज़्यादा पूछा जाने वाला हिस्सा है। ऊर्जा का पिरामिड हमेशा सीधा होता है। जैवभार का पिरामिड समुद्र में उल्टा हो जाता है। संख्या का पिरामिड भी उल्टा हो सकता है, जैसे एक बड़े पेड़ पर बहुत सारे कीट।
  • खाद्य शृंखला: चराई शृंखला और अपरद शृंखला, तथा खाद्य जाल।

जैव विविधता एवं संरक्षण (Biodiversity and Conservation)

इस चैप्टर के सवाल लगभग पूरे के पूरे आँकड़ों और उदाहरणों पर आधारित होते हैं, इसलिए इन्हें सीधे NCERT से याद कीजिए।

  • जाति क्षेत्र संबंध: लघुगणक S बराबर लघुगणक C जोड़ Z गुणा लघुगणक A। छोटे क्षेत्रों में Z का मान करीब 0.1 से 0.2, और बहुत बड़े क्षेत्रों में करीब 0.6 से 1.2।
  • ज़रूरी आँकड़े: दुनिया में वर्णित जातियाँ करीब 15 लाख से थोड़ी ज़्यादा, और रॉबर्ट मे का अनुमान करीब 70 लाख। जंतुओं में कीट अकेले करीब 70 प्रतिशत हैं।
  • भारत: दुनिया के क्षेत्रफल का सिर्फ 2.4 प्रतिशत, पर जैव विविधता का 8.1 प्रतिशत।
  • हॉटस्पॉट: NCERT के अनुसार कुल 34, जिनमें भारत के तीन हैं, पश्चिमी घाट तथा श्रीलंका, हिमालय, और इंडो बर्मा।
  • अक्षांशीय प्रवणता: भूमध्य रेखा से ध्रुवों की ओर जाने पर विविधता घटती है, और सबसे ज़्यादा विविधता अमेज़न के वर्षावन में है।
  • विलुप्ति के चार कारण (Evil Quartet): आवास का नुकसान तथा विखंडन (सबसे बड़ा कारण), अति दोहन, बाहरी जातियों का आक्रमण (जैसे विक्टोरिया झील में नील पर्च), और सह विलुप्ति।
  • संरक्षण: स्व स्थाने (in situ) जैसे राष्ट्रीय उद्यान, अभयारण्य, जीवमंडल आरक्षित क्षेत्र और पवित्र उपवन। बाह्य स्थाने (ex situ) जैसे चिड़ियाघर, वानस्पतिक उद्यान, बीज बैंक और शून्य से 196 डिग्री सेल्सियस पर क्रायोप्रिज़र्वेशन।

यह यूनिट सबसे ज़्यादा फायदा क्यों देती है

इसकी तीन खूबियाँ हैं। पहली, इसके सवाल ज़्यादातर सीधे NCERT की लाइनों से बनते हैं। दूसरी, इसमें न्यूमेरिकल या कठिन गणना लगभग नहीं है, ज़्यादातर याद रखने वाली बातें हैं। तीसरी, इसे दोहराने में बहुत कम समय लगता है, इसलिए परीक्षा से पहले भी इसे तेज़ी से पलटा जा सकता है। यानी कम मेहनत में सबसे पक्के नंबर।

इसे दोहराने का सही तरीका

  • उदाहरणों की एक सूची बनाएँ, हर अंतर्क्रिया के आगे उसका उदाहरण।
  • आँकड़ों का एक पन्ना बनाएँ, जिसमें 2.4 और 8.1 प्रतिशत, 34 हॉटस्पॉट, Z के मान और दस प्रतिशत का नियम हो।
  • पिरामिड वाले चित्र ज़रूर देखें, खासकर कौन सा उल्टा हो सकता है।
  • NCERT की लाइनें पढ़ें और पिछले सालों के सवाल हल करें, क्योंकि इस यूनिट में सवाल बहुत दोहराते हैं।

एक ज़रूरी बात

पारिस्थितिकी को आखिर के लिए छोड़ देना सबसे आम और सबसे महँगी गलती है। यह आसान ज़रूर है, पर आसान होने का मतलब यह नहीं कि बिना पढ़े नंबर मिल जाएँगे। इसके सवाल आँकड़ों और उदाहरणों पर टिके होते हैं, और वे तभी याद रहते हैं जब कम से कम दो तीन बार दोहराए जाएँ। एक और बात, यहाँ आँकड़े हमेशा NCERT वाले ही लिखें, बाहर से पढ़े हुए ताज़ा आँकड़े परीक्षा में गलत साबित हो सकते हैं।

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अरिविहान पर आसान हिंदी में पारिस्थितिकी के हर चैप्टर के वीडियो, NCERT आधारित नोट्स, ज़रूरी आँकड़ों तथा उदाहरणों की टेबल और चैप्टर वाइज़ MCQ मिलते हैं, वह भी नए सिलेबस के हिसाब से। इससे यह यूनिट कम समय में पक्की हो जाती है, और कंप्यूटर पर मॉक टेस्ट देकर आप नए CBT मोड की आदत भी बना सकते हैं। मन लगाकर पढ़िए और डॉक्टर बनने का सपना पूरा कीजिए!


FAQs

यह आर्टिकल जुलाई 2026 तक उपलब्ध जानकारी, नई (रेशनलाइज़्ड) NCERT और पिछले सालों के NEET पेपर के विश्लेषण पर आधारित है। यहाँ दिया गया वेटेज अंदाज़न है और यहाँ दिए आँकड़े NCERT के अनुसार हैं, जो मौजूदा वास्तविक आँकड़ों से अलग हो सकते हैं। सिलेबस तथा हटाए गए चैप्टर की पक्की जानकारी के लिए nta.ac.in, neet.nta.nic.in, nmc.org.in और ncert.nic.in पर ज़रूर जाँच लें।

Tags: RBSE UPMSP MPBSE NEET

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