Arivihan Logo
Ask Doubt Now !!
neet

इनऑर्गेनिक केमिस्ट्री, आवर्त गुणों और रिएक्शन को ऐसे याद करें कि भूलें नहीं

Published on Aug 05, 2026 · 1 min read · 2 views
इनऑर्गेनिक केमिस्ट्री, आवर्त गुणों और रिएक्शन को ऐसे याद करें कि भूलें नहीं

इनऑर्गेनिक केमिस्ट्री, आवर्त गुणों और रिएक्शन को ऐसे याद करें कि भूलें नहीं

इनऑर्गेनिक केमिस्ट्री को लेकर स्टूडेंट दो हिस्सों में बँटे रहते हैं, कुछ इसे सबसे आसान मानते हैं और कुछ कहते हैं कि याद ही नहीं रहता। सच यह है कि यह केमिस्ट्री का सबसे सीधा और स्कोरिंग हिस्सा है, क्योंकि इसके ज़्यादातर सवाल सीधे NCERT से आते हैं। पिछले सालों के विश्लेषण के हिसाब से केमिस्ट्री के 45 सवालों में से करीब 10 से 12 सवाल इनऑर्गेनिक से आते हैं। भूलने की असली वजह रटना है, समझना नहीं। इस आर्टिकल में आवर्त गुणों के पीछे का तर्क और याद रखने के वे तरीके बताए गए हैं जो सच में काम करते हैं।

पहले यह जान लीजिए, कौन से चैप्टर हट चुके हैं

नई (रेशनलाइज़्ड) NCERT और NEET के सिलेबस, दोनों से ये चैप्टर हटा दिए गए हैं, इन्हें बिल्कुल न पढ़ें, s-ब्लॉक तत्व, हाइड्रोजन, धातुकर्म (Metallurgy) और पर्यावरणीय रसायन। अब इनऑर्गेनिक में जो बचता है वह है, तत्वों का वर्गीकरण तथा आवर्तिता, रासायनिक बंधन, p-ब्लॉक, d तथा f-ब्लॉक, और उपसहसंयोजन यौगिक।

आवर्त गुणों के पीछे सिर्फ दो बातें हैं

यह पूरे आर्टिकल की सबसे ज़रूरी बात है। सारे आवर्त गुण सिर्फ दो चीज़ों से समझे जा सकते हैं।

  • प्रभावी नाभिकीय आवेश (Zeff): यानी बाहरी इलेक्ट्रॉन पर नाभिक की असली खिंचाव शक्ति।
  • परिरक्षण (shielding): यानी अंदर के इलेक्ट्रॉन उस खिंचाव को कितना रोकते हैं।

आवर्त में आगे बढ़ने पर शेल वही रहता है पर प्रोटॉन बढ़ते हैं, इसलिए खिंचाव बढ़ता है और आकार घटता है। समूह में नीचे जाने पर नया शेल जुड़ता है और परिरक्षण बढ़ता है, इसलिए आकार बढ़ता है और खिंचाव घटता है। बस इतना समझ लेने पर ज़्यादातर ट्रेंड खुद ब खुद निकल आते हैं।

मुख्य आवर्त गुण और उनके अपवाद

  • परमाणु और आयनिक त्रिज्या: आवर्त में घटती है, समूह में बढ़ती है। धनायन मूल परमाणु से छोटा और ऋणायन बड़ा होता है। समइलेक्ट्रॉनी में जिसके प्रोटॉन ज़्यादा वह छोटा।
  • आयनन एन्थैल्पी: आवर्त में बढ़ती है, समूह में घटती है। अपवाद 1: बेरिलियम की बोरॉन से ज़्यादा, क्योंकि Be का 2s पूर्ण भरा और स्थायी है। अपवाद 2: नाइट्रोजन की ऑक्सीजन से ज़्यादा, क्योंकि N का 2p अर्धपूरित और स्थायी है, जबकि O में युग्मित इलेक्ट्रॉन निकालना पड़ता है। यही तर्क Mg और Al तथा P और S पर भी लगता है।
  • इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी: यहाँ सबसे बड़ा अपवाद यह है कि क्लोरीन का मान फ्लोरीन से ज़्यादा ऋणात्मक होता है, क्योंकि फ्लोरीन का 2p कक्षक बहुत छोटा है और आने वाले इलेक्ट्रॉन को प्रतिकर्षण झेलना पड़ता है। क्रम है Cl, फिर F, फिर Br, फिर I।
  • विद्युत ऋणात्मकता: आवर्त में बढ़ती है, समूह में घटती है। फ्लोरीन सबसे ज़्यादा विद्युत ऋणात्मक है।
  • धात्विक गुण: आवर्त में घटता है, समूह में बढ़ता है। तिरछा संबंध याद रखें, जैसे लिथियम तथा मैग्नीशियम, और बेरिलियम तथा ऐलुमिनियम।

याद रखने के वे तरीके जो सच में काम करते हैं

  • पहले तर्क समझें, फिर याद करें: जब आपको पता हो कि अपवाद क्यों है, तो उसे रटना नहीं पड़ता, वह खुद निकल आता है।
  • तुलना वाली टेबल बनाएँ: हर समूह के गुण, ऑक्साइड, ऑक्सी अम्ल और ऑक्सीकरण अवस्थाएँ एक टेबल में रखें, बिखरे हुए नोट्स से नहीं।
  • रिएक्शन को पैटर्न के हिसाब से पढ़ें: जैसे सारे हैलोजन के ट्रेंड एक साथ, अलग अलग नहीं।
  • NCERT की टेबल और चित्र सीधे इस्तेमाल करें, क्योंकि कई सवाल वहीं से बनते हैं।
  • फ्लैशकार्ड और बार बार दोहराई: रंग, चुंबकीय गुण और इलेक्ट्रॉनिक विन्यास जैसी तथ्य वाली बातों के लिए फ्लैशकार्ड बनाएँ और बढ़ते अंतराल पर दोहराएँ।
  • अपने खुद के मनेमोनिक बनाएँ: समूह के तत्वों या स्पेक्ट्रोरासायनिक श्रेणी के लिए खुद का बनाया हुआ छोटा वाक्य, दूसरों के बनाए से कहीं ज़्यादा याद रहता है।
  • हर हफ्ते दोहराएँ: इनऑर्गेनिक सबसे जल्दी भूलने वाला हिस्सा है, इसलिए नियमित दोहराई ही यहाँ सफलता की सबसे बड़ी वजह है।

चैप्टर के हिसाब से सबसे ज़रूरी हिस्से

  • रासायनिक बंधन: VSEPR से आकृति, संकरण, बंध कोटि (bond order), और अणु कक्षक सिद्धांत। ऑक्सीजन का अनुचुंबकीय होना और नाइट्रोजन का प्रतिचुंबकीय होना बार बार पूछा जाता है। द्विध्रुव आघूर्ण में जल ध्रुवीय, जबकि CO2 का शून्य।
  • p-ब्लॉक: हर समूह के पहले तत्व का असामान्य व्यवहार, अक्रिय युग्म प्रभाव, ऑक्सी अम्लों की संरचना और क्षारकता, अपररूप (हीरा, ग्रेफाइट, फुलरीन, सफेद तथा लाल फॉस्फोरस), अंतराहैलोजन यौगिक, और उत्कृष्ट गैसों के यौगिक जैसे XeF2 (रैखिक) तथा XeF4 (वर्ग समतलीय)।
  • d और f-ब्लॉक: विन्यास के अपवाद, यानी क्रोमियम में 3d5 4s1 और कॉपर में 3d10 4s1। परिवर्ती ऑक्सीकरण अवस्थाएँ, रंग का कारण, और चुंबकीय आघूर्ण का सूत्र, यानी वर्गमूल n गुणा (n जोड़ 2)। लैंथेनॉयड संकुचन की वजह से ज़र्कोनियम और हैफ्नियम का आकार लगभग बराबर हो जाता है।
  • उपसहसंयोजन यौगिक: IUPAC नामकरण, समावयवता, VBT, और क्रिस्टल क्षेत्र सिद्धांत (CFT)। स्पेक्ट्रोरासायनिक श्रेणी में कमज़ोर से मज़बूत की ओर, जैसे आयोडाइड, ब्रोमाइड, क्लोराइड, फ्लोराइड, जल, अमोनिया, en, सायनाइड और CO। मज़बूत क्षेत्र में निम्न चक्रण और कमज़ोर क्षेत्र में उच्च चक्रण बनता है।

कौन सी गलतियाँ सबसे ज़्यादा नुकसान करती हैं

  • इसे पूरी तरह रटने की चीज़ मान लेना, जिससे अपवाद वाले सवालों में गड़बड़ हो जाती है।
  • NCERT के अपवाद छोड़ देना, जैसे Cr और Cu का विन्यास या Cl तथा F वाला अपवाद।
  • दोहराई न करना, जिससे पढ़ा हुआ कुछ हफ्तों में उतर जाता है।
  • NCERT की टेबल छोड़ देना, जबकि सवाल सीधे उन्हीं से बनते हैं।
  • हटाए गए चैप्टर पढ़ते रहना, जैसे s-ब्लॉक या धातुकर्म, जिन पर लगाया समय पूरी तरह बर्बाद जाता है।

एक ज़रूरी बात

इनऑर्गेनिक में सबसे बड़ी गलती है इसे परीक्षा से ठीक पहले रटने के लिए छोड़ देना। यह हिस्सा जितनी जल्दी याद होता है, उतनी ही जल्दी उतर भी जाता है, इसलिए इसका असली राज़ है हर हफ्ते थोड़ी थोड़ी दोहराई। और रटने के बजाय हर ट्रेंड के पीछे का कारण समझने की आदत डालिए, क्योंकि NEET में सीधा ट्रेंड कम और उसका अपवाद ज़्यादा पूछा जाता है।

अरिविहान आपकी कैसे मदद करता है

अरिविहान पर आसान हिंदी में इनऑर्गेनिक केमिस्ट्री के हर चैप्टर के वीडियो, NCERT आधारित नोट्स, ट्रेंड तथा अपवाद की तुलना वाली टेबल और चैप्टर वाइज़ MCQ मिलते हैं, वह भी नए सिलेबस के हिसाब से। इससे यह हिस्सा रटने के बजाय समझकर याद रहता है, और कंप्यूटर पर मॉक टेस्ट देकर आप नए CBT मोड की आदत भी बना सकते हैं। मन लगाकर पढ़िए और डॉक्टर बनने का सपना पूरा कीजिए!


FAQs

यह आर्टिकल जुलाई 2026 तक उपलब्ध जानकारी, नई (रेशनलाइज़्ड) NCERT और पिछले सालों के NEET पेपर के विश्लेषण पर आधारित है। यहाँ दिया गया वेटेज अंदाज़न है, NTA इसे आधिकारिक रूप से जारी नहीं करता। सिलेबस तथा हटाए गए चैप्टर की पक्की जानकारी के लिए nta.ac.in, neet.nta.nic.in, nmc.org.in और ncert.nic.in पर ज़रूर जाँच लें।

Tags: RBSE UPMSP MPBSE. NEET

© Copyright - 2026. All right reserved to Arivihan Technologies Pvt. Ltd.