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NEET में कब अंदाज़ा लगाएँ और कब छोड़ें — निगेटिव मार्किंग की समझ

Published on Aug 26, 2026 · 1 min read · 2 views
NEET में कब अंदाज़ा लगाएँ और कब छोड़ें — निगेटिव मार्किंग की समझ

NEET में कब अंदाज़ा लगाएँ और कब छोड़ें — निगेटिव मार्किंग की समझ

NEET में हर सही जवाब पर मार्क्स मिलते हैं, पर हर गलत जवाब पर मार्क्स कटते भी हैं, इसे निगेटिव मार्किंग (negative marking) कहते हैं। यहीं पर एक बड़ा सवाल आता है, जिस सवाल का जवाब पक्का न पता हो, उस पर अंदाज़ा लगाएँ या छोड़ दें। सही फैसला आपके नंबर और रैंक दोनों बदल सकता है। RBSE, UPMSP और MPBSE के हिंदी मीडियम स्टूडेंट यह समझदारी कैसे सीखें, यही आसान भाषा में इस आर्टिकल में...

NEET की मार्किंग कैसे होती है

फैसला लेने से पहले मार्किंग का नियम साफ़ समझ लीजिए।

  • सही जवाब: हर सही जवाब पर 4 मार्क्स।
  • गलत जवाब: हर गलत जवाब पर 1 मार्क्स कटता है।
  • छोड़ा हुआ सवाल: न करने पर कोई मार्क्स नहीं कटता, यानी शून्य।

NEET में अंदाज़ा लगाने का औसत फायदा और नुकसान

मान लीजिए किसी सवाल के बारे में कुछ पता नहीं और आप चारों ऑप्शन में से बिलकुल अंदाज़े से एक चुनते हैं। औसतन इसका बहुत थोड़ा फायदा दिखता है, पर असल में जोखिम ज़्यादा है।

  • बड़ा झूला: एक गलत अंदाज़ा सही जवाब के मुकाबले 5 मार्क्स का फर्क डाल देता है।
  • ट्रैप ऑप्शन: NEET के गलत ऑप्शन जानबूझकर सही जैसे बनाए जाते हैं, इसलिए बिलकुल अंधे अंदाज़े में सही होने का मौका अक्सर कम रहता है।
  • नतीजा: इसलिए बिलकुल कुछ न पता हो, तो अंधाधुंध अंदाज़ा फायदे से ज़्यादा नुकसान कर सकता है।

NEET में ऑप्शन हटाकर अंदाज़ा लगाना कब सही है

असली समझदारी यह है, अगर आप गलत ऑप्शन हटा सकें, तो अंदाज़ा लगाना फायदेमंद हो जाता है।

  • एक ऑप्शन हटाएँ: तीन में से चुनने पर सही होने का मौका बढ़ जाता है, फायदा भी बढ़ता है।
  • दो ऑप्शन हटाएँ: दो में से चुनने पर फायदा और भी ज़्यादा हो जाता है, यह अंदाज़ा लगाने लायक होता है।
  • पक्का नियम: जब दो या उससे ज़्यादा ऑप्शन हटा सकें, तभी अंदाज़ा लगाइए।

कब सवाल छोड़ देना बेहतर है

हर सवाल हल करना ज़रूरी नहीं। कभी कभी छोड़ना ही सबसे समझदारी भरा कदम होता है।

  • बिलकुल कुछ न पता हो: जब चारों ऑप्शन बराबर अनजान लगें, तो छोड़ देना बेहतर है।
  • शून्य, कटौती से अच्छा: छोड़ने पर शून्य मिलता है, जो एक मार्क्स कटने से बेहतर है।

हिंदी मीडियम (RBSE, UPMSP, MPBSE) स्टूडेंट के लिए स्मार्ट तरीका

हिंदी मीडियम स्टूडेंट सवाल पढ़ते समय इंग्लिश टर्म ध्यान से देखें, क्योंकि किसी उलझन में इंग्लिश वर्शन को ही आख़िरी माना जाता है।

  • ठंडे दिमाग से: हर सवाल पर जल्दबाज़ी में अंदाज़ा मत लगाइए।
  • पहले ऑप्शन हटाइए: अंदाज़े से पहले गलत ऑप्शन काटने की कोशिश कीजिए।

NEET में दो राउंड वाला तरीका

पूरा पेपर दो राउंड में हल करना सबसे अच्छा तरीका है।

  • पहला राउंड: पहले वही सवाल कीजिए जिनका जवाब पक्का पता हो, बाकी को निशान लगाकर छोड़ दीजिए।
  • दूसरा राउंड: बचे समय में निशान वाले सवालों पर लौटिए और ऑप्शन हटाकर सोचिए।

NEET में ज़्यादा सवाल नहीं, सही सवाल (एक्युरेसी)

कई स्टूडेंट सोचते हैं कि जितने ज़्यादा सवाल हल करेंगे, उतना अच्छा। पर सच यह है कि सही सवाल ज़्यादा मायने रखते हैं।

  • एक्युरेसी बड़ी बात: जानकारों के मुताबिक कम सवाल पर ज़्यादा सही जवाब, ज़्यादा सवाल पर कम सही से बेहतर हैं।
  • गलतियाँ कम कीजिए: हर गलत जवाब आपके पक्के मार्क्स को भी घटा देता है।
  • यह अंदाज़न सलाह है: कितने सवाल करने हैं, यह हर स्टूडेंट अपने मॉक टेस्ट से तय करे।

एक ज़रूरी बात

निगेटिव मार्किंग में सबसे अच्छा नियम आसान है, जब दो या ज़्यादा ऑप्शन हटा सकें तभी अंदाज़ा लगाइए, और जब बिलकुल कुछ पता न हो तो सवाल छोड़ दीजिए। अंधाधुंध अंदाज़ा फायदे से ज़्यादा नुकसान कर सकता है। कितने सवाल हल करने हैं, यह अपने मॉक टेस्ट से तय कीजिए, यहाँ दी गई सलाह सामान्य है।

अरिविहान आपकी कैसे मदद करता है

अरिविहान पर आसान हिंदी में हम मॉक टेस्ट और पेपर की सही रणनीति इस तरह सिखाते हैं कि RBSE, UPMSP और MPBSE के हिंदी मीडियम स्टूडेंट निगेटिव मार्किंग से बिना डरे सही फैसले लें। भरोसे के साथ मन लगाकर पढ़िए और डॉक्टर बनने का सपना पूरा कीजिए!


FAQs

यह आर्टिकल जुलाई 2026 तक उपलब्ध जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है और सामान्य पढ़ाई तथा रणनीति से जुड़ी सलाह है। मार्किंग का नियम और पैटर्न बदल सकता है, इसलिए NEET से जुड़ी पक्की जानकारी के लिए neet.nta.nic.in, nta.ac.in और nmc.org.in पर ज़रूर जाँच लें।

Tags: RBSE UPMSP MPBSE NEET

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