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NEET की मार्किंग और नेगेटिव मार्किंग, वह अटेम्प्ट स्ट्रैटेजी जो आपका स्कोर बचाती है

Published on Jul 31, 2026 · 1 min read · 2 views
NEET की मार्किंग और नेगेटिव मार्किंग, वह अटेम्प्ट स्ट्रैटेजी जो आपका स्कोर बचाती है

NEET की मार्किंग और नेगेटिव मार्किंग, वह अटेम्प्ट स्ट्रैटेजी जो आपका स्कोर बचाती है

NEET में सिर्फ सही जवाब देना काफी नहीं, यह भी समझना ज़रूरी है कि कब सवाल छोड़ना है और कब अंदाज़ा लगाना है। कई अच्छे स्टूडेंट सिर्फ इसलिए पीछे रह जाते हैं क्योंकि घबराहट में ज़्यादा सवाल टिक कर देते हैं और नेगेटिव मार्किंग से नंबर कट जाते हैं। असल में एक समझदार अटेम्प्ट स्ट्रैटेजी आपके कई नंबर बचा सकती है और रैंक में बड़ा फर्क डाल सकती है। इस आर्टिकल में मार्किंग का पूरा हिसाब और स्कोर बचाने वाली स्ट्रैटेजी आसान भाषा में दी गई है।

पहले मार्किंग का हिसाब समझ लीजिए

  • कुल 180 सवाल और 720 नंबर। हर सही जवाब पर +4 नंबर।
  • हर गलत जवाब पर −1 नंबर। न टिक करने पर कुछ नहीं कटता, यानी 0।
  • NEET 2027 अब कंप्यूटर पर (CBT मोड में) होगी, पर मार्किंग का यह नियम वही रहेगा।

नेगेटिव मार्किंग असल में कितनी भारी पड़ती है

यह बात ध्यान से समझें, क्योंकि यहीं सबसे बड़ा खेल है। एक गलत जवाब सिर्फ −1 नहीं, बल्कि असल में 5 नंबर का नुकसान होता है। क्योंकि अगर वही सवाल आप छोड़ देते तो 0 मिलता, सही करते तो +4 मिलते, पर गलत करने पर −1 हो गया। यानी +4 का मौका भी गया और −1 अलग से लगा।

इसीलिए हर सवाल टिक करने से पहले सोचना ज़रूरी है, आँख मूँदकर टिक करना नंबर बढ़ाता नहीं, घटाता है।

कब अंदाज़ा लगाएँ और कब सवाल छोड़ें

यह सबसे काम का नियम है, इसे अच्छे से समझ लें।

  • कोई ऑप्शन हटा नहीं पा रहे: अगर चारों में से कोई भी ऑप्शन गलत नहीं लगता, तो अंदाज़ा लगाना फायदेमंद नहीं, ऐसा सवाल छोड़ दें।
  • एक ऑप्शन हटा सकते हैं: अगर एक ऑप्शन गलत पहचान कर हटा सकते हैं, तो बाकी तीन में से अंदाज़ा लगाना फायदे का सौदा हो जाता है।
  • दो ऑप्शन हटा सकते हैं: अगर दो ऑप्शन हटा सकते हैं, तो बचे दो में से अंदाज़ा ज़रूर लगाएँ, यहाँ फायदा साफ ज़्यादा है।

सीधा नियम याद रखें, कुछ हटा नहीं पा रहे तो छोड़ दो, एक या दो हटा पा रहे हो तो सोच समझकर अंदाज़ा लगाओ।

सारे 180 सवाल टिक करना ज़रूरी नहीं

यह गलतफहमी बहुत नुकसान करती है कि हर सवाल का जवाब देना ही है।

  • पक्के भरोसे वाले सवाल: ज़्यादातर स्टूडेंट के लिए समझदारी इसमें है कि करीब 150 से 165 सवाल पक्के भरोसे के साथ करें, और 85 से 90 प्रतिशत सटीकता (accuracy) रखें।
  • टॉपर भी सवाल छोड़ते हैं: कई टॉपर जानबूझकर 15 से 25 ऐसे सवाल छोड़ देते हैं, जिन पर उन्हें भरोसा नहीं होता।
  • वजह: अगर आप 20 से 30 सवालों पर आँख मूँदकर अंदाज़ा लगाते हैं, तो नेगेटिव मार्किंग की वजह से फायदा कम और नुकसान ज़्यादा हो जाता है।

याद रखें, कम सवाल सही सटीकता के साथ करना, ज़्यादा सवाल गलतियों के साथ करने से हमेशा बेहतर है।

एग्ज़ाम में कौन सी गलतियाँ नंबर कटवाती हैं

  • घबराहट में ज़्यादा टिक करना: सबसे ज़्यादा नेगेटिव मार्किंग आखिरी आधे घंटे में होती है, जब समय के दबाव में स्टूडेंट अंधाधुंध टिक करने लगते हैं।
  • छोटी गलतियाँ: सवाल में "नहीं" या "except" जैसे शब्द न पढ़ना, यूनिट भूल जाना, या दो ऑप्शन पढ़कर ही जवाब चुन लेना।
  • एक सवाल पर बहुत देर लगाना: 30 से 40 सेकंड में तय कर लें कि सवाल आता है या इसे छोड़ना है।
  • कंप्यूटर पर गलत क्लिक: CBT में गलत जगह क्लिक होने का खतरा रहता है, इसलिए स्क्रीन पर सवाल भरने की प्रैक्टिस पहले से करें।

एग्ज़ाम वाले दिन की सही स्ट्रैटेजी (कई राउंड में)

  • पहला राउंड: सबसे पहले वे सवाल करें जो पक्के आते हैं। अपने सबसे मज़बूत सब्जेक्ट (आमतौर पर बायोलॉजी या केमिस्ट्री) से शुरू करें, ताकि पक्के नंबर पहले जमा हो जाएँ।
  • दूसरा राउंड: उन सवालों पर लौटें जो आते तो हैं पर थोड़ा समय माँगते हैं।
  • तीसरा राउंड: अब सिर्फ उन सवालों पर अंदाज़ा लगाएँ जहाँ आप एक या दो ऑप्शन हटा सकते हैं।
  • समय का ध्यान: हर सवाल पर औसतन एक मिनट रखें, और आखिरी 10 मिनट में कोई बिल्कुल नया सवाल न छेड़ें जब तक वह पक्का न आता हो।

नेगेटिव मार्किंग से नंबर बचाना क्यों इतना ज़रूरी है

NEET में एक एक नंबर से हज़ारों रैंक आगे पीछे हो जाती हैं, खासकर ऊपर की रैंक में जहाँ स्कोर बहुत पास पास होते हैं। यानी नेगेटिव मार्किंग में गँवाए गए 2 या 3 नंबर आपकी रैंक कई हज़ार नीचे ले जा सकते हैं। इसीलिए सटीकता और नंबर बचाना, ज़्यादा सवाल टिक करने से कहीं ज़्यादा मायने रखता है। ध्यान रहे, कितने नंबर पर कौन सी रैंक आएगी, यह हर साल पेपर की कठिनाई से बदलता है।

एक ज़रूरी बात

अटेम्प्ट स्ट्रैटेजी सिर्फ पढ़ने की चीज़ नहीं, इसे मॉक टेस्ट में बार बार आज़माकर अपनी आदत बनाना ज़रूरी है। हर मॉक टेस्ट के बाद यह ज़रूर देखें कि कितने सवाल गलत हुए और उनमें से कितने अंदाज़े वाले थे, इससे आपको पता चलेगा कि आपके लिए सही अटेम्प्ट कितने हैं। एक बात कभी न भूलें, NEET में इनाम सिर्फ ज़्यादा सवाल करने का नहीं, सही सवाल करने का है।

अरिविहान आपकी कैसे मदद करता है

अरिविहान पर आसान हिंदी में कंप्यूटर पर मॉक टेस्ट और चैप्टर वाइज़ MCQ मिलते हैं, जहाँ आप नेगेटिव मार्किंग के साथ अपनी सटीकता और सही अटेम्प्ट की संख्या पर काम कर सकते हैं। हर टेस्ट के बाद अपनी गलतियाँ देखकर आप अपनी अटेम्प्ट स्ट्रैटेजी सुधार सकते हैं और नए CBT मोड की आदत भी बना सकते हैं। मन लगाकर पढ़िए और डॉक्टर बनने का सपना पूरा कीजिए!


FAQs

यह आर्टिकल जुलाई 2026 तक उपलब्ध जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। NEET 2027 का पैटर्न, मार्किंग और मोड NTA तथा NMC के आधिकारिक नोटिफिकेशन से तय होंगे, इसलिए तैयारी से पहले nta.ac.in, neet.nta.nic.in और nmc.org.in पर ताज़ा जानकारी ज़रूर जाँच लें।

Tags: RBSE MPBSE UPMSP NEET 2027

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