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NEET में हिंदी मीडियम के स्टूडेंट, सच में नुकसान या सिर्फ एक मिथक?

Published on Jul 31, 2026 · 1 min read · 1 views
NEET में हिंदी मीडियम के स्टूडेंट, सच में नुकसान या सिर्फ एक मिथक?

NEET में हिंदी मीडियम के स्टूडेंट, सच में नुकसान या सिर्फ एक मिथक?

हिंदी मीडियम के स्टूडेंट अक्सर सुनते हैं कि NEET तो इंग्लिश वालों की परीक्षा है, हिंदी से अच्छे नंबर नहीं आते। यह बात सुनकर बहुत से होनहार स्टूडेंट हिम्मत हार जाते हैं। तो आइए बिना बढ़ा चढ़ाकर, आँकड़ों और असली उदाहरणों के साथ देखते हैं कि यह डर कितना सच है और कितना सिर्फ एक मिथक। सीधा जवाब यह है कि ज़्यादातर हिस्सा मिथक है, और जो थोड़ी बहुत असली दिक्कत है, वह आसानी से दूर हो जाती है।

पहले कुछ ज़रूरी आँकड़े और नियम

  • लाखों स्टूडेंट हिंदी में: NEET 13 भाषाओं में होती है, जिनमें हिंदी भी है। हर साल करीब 3 लाख से ज़्यादा स्टूडेंट हिंदी में NEET देते हैं, यानी करीब हर सातवाँ स्टूडेंट। इंग्लिश के बाद हिंदी दूसरी सबसे ज़्यादा चुनी जाने वाली भाषा है।
  • पेपर बाइलिंगुअल मिलता है: हिंदी चुनने पर हर सवाल हिंदी और इंग्लिश दोनों में लिखा होता है।
  • सबसे अहम नियम: अगर किसी सवाल के हिंदी और इंग्लिश वर्जन में कोई कन्फ्यूज़न हो, तो इंग्लिश वर्जन ही फाइनल माना जाता है।

सबसे बड़ा सबूत, टॉप रैंक भी हिंदी मीडियम से

सबसे सीधा जवाब उन स्टूडेंट्स से मिलता है जो हिंदी मीडियम से रहकर टॉप पर पहुँचे। NEET 2025 में पूरे देश में पहली रैंक राजस्थान के एक हिंदी मीडियम सरकारी स्कूल के स्टूडेंट ने हासिल की, जिसके 720 में से 686 नंबर आए। उसका खुद का कहना था कि NEET अब NCERT पर आधारित परीक्षा है, इसलिए सिर्फ कोचिंग नोट्स पर निर्भर न रहें, बल्कि पूरी NCERT गहराई से पढ़ें, और भाषा से ज़्यादा मेहनत मायने रखती है। यानी हिंदी मीडियम, टॉप रैंक की राह में रुकावट नहीं है।

असली दिक्कत कहाँ है (जो दूर हो सकती है)

  • इंग्लिश टर्मिनोलॉजी: साइंटिफिक नेम, MCQ के ऑप्शन और डायग्राम के लेबल इंग्लिश में रहते हैं, इसलिए इन इंग्लिश शब्दों पर पकड़ बनानी होती है।
  • रिसोर्स: ज़्यादातर बढ़िया रेफरेंस बुक और टेस्ट सीरीज़ इंग्लिश में हैं, पर अब अच्छे हिंदी रिसोर्स भी बढ़ रहे हैं।
  • कभी कभी अनुवाद: कुछ गिने चुने सवालों में हिंदी अनुवाद थोड़ा अटपटा लग सकता है, ऐसे में इंग्लिश वर्जन देख लें, जो साथ ही होता है और फाइनल भी माना जाता है।

और कौन सी बातें सिर्फ मिथक हैं

  • टॉप नंबर नहीं ला सकते: यह मिथक है। पहली रैंक तक हिंदी मीडियम से आई है।
  • भाषा ही नंबर तय करती है: यह भी मिथक है। असल में NEET NCERT पर आधारित है और हिंदी NCERT भी उतनी ही अच्छी है।
  • पूरा मीडियम बदलना पड़ेगा: यह भी गलत है। सिर्फ इंग्लिश टर्म सीखनी है, पूरा मीडियम बदलने की ज़रूरत नहीं।

गैप कैसे भरें

  • दोनों NCERT साथ रखें: पढ़ाई हिंदी NCERT से करें, पर इंग्लिश NCERT भी साथ रखें, दोनों मुफ्त हैं।
  • शब्द सूची बनाएँ: एक छोटी ग्लॉसरी बनाएँ, जिसमें हिंदी टर्म, इंग्लिश टर्म और छोटा मीनिंग हो। हिंदी NCERT में ज़्यादातर टर्म के आगे ब्रैकेट में इंग्लिश टर्म पहले से दिया रहता है।
  • बाइलिंगुअल प्रैक्टिस: MCQ की प्रैक्टिस बाइलिंगुअल या इंग्लिश सेट से करें, ताकि सवाल में इंग्लिश टर्म देखकर घबराहट न हो।
  • कंप्यूटर पर मॉक टेस्ट: कंप्यूटर पर मॉक टेस्ट दें, क्योंकि NEET 2027 अब CBT मोड में होगी।

एक ज़रूरी बात

हिंदी मीडियम को लेकर सबसे बड़ी गलती है खुद को कम समझना और बीच तैयारी में अचानक पूरी तरह इंग्लिश मीडियम में जाने की कोशिश करना, इससे कन्फ्यूज़न बढ़ता है और आत्मविश्वास टूटता है। यहाँ बात मीडियम बदलने की नहीं, सिर्फ इंग्लिश टर्मिनोलॉजी जोड़ने की है। अच्छे रिसोर्स सिर्फ इसलिए न छोड़ें कि वे इंग्लिश में हैं, और एग्ज़ाम में कोई हिंदी लाइन अटपटी लगे तो घबराएँ नहीं, इंग्लिश वर्जन साथ ही है।

अरिविहान आपकी कैसे मदद करता है

अरिविहान पर आसान हिंदी में NEET की पूरी तैयारी होती है, जहाँ फिज़िक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी के चैप्टर वाइज़ वीडियो और NCERT आधारित नोट्स के साथ ज़रूरी इंग्लिश टर्म भी बताई जाती हैं। यानी आप हिंदी में समझकर इंग्लिश टर्मिनोलॉजी पर भी पकड़ बना सकते हैं, और कंप्यूटर पर मॉक टेस्ट देकर नए CBT मोड की आदत भी डाल सकते हैं। मन लगाकर पढ़िए और डॉक्टर बनने का सपना पूरा कीजिए!


FAQs

यह आर्टिकल जुलाई 2026 तक उपलब्ध जानकारी और आँकड़ों पर आधारित है। हिंदी में परीक्षा देने वालों की संख्या और नियम हर साल थोड़े बदल सकते हैं। भाषा विकल्प और पैटर्न की ताज़ा जानकारी के लिए फॉर्म भरने से पहले nta.ac.in, neet.nta.nic.in और ncert.nic.in पर ज़रूर देखें।

Tags: RBSE UPMSP MPBSE NEET

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