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NEET में आरक्षण की श्रेणियाँ और सीट कैसे मिलती है, एक आसान गाइड

Published on Aug 10, 2026 · 1 min read · 3 views
NEET में आरक्षण की श्रेणियाँ और सीट कैसे मिलती है, एक आसान गाइड

NEET में आरक्षण की श्रेणियाँ और सीट कैसे मिलती है, एक आसान गाइड

NEET का नंबर आ जाने के बाद असली खेल काउंसलिंग में होता है, और यहाँ आरक्षण की श्रेणियाँ बड़ी भूमिका निभाती हैं। बहुत से स्टूडेंट को यह ठीक से पता नहीं होता कि कौन सी श्रेणी में कितनी सीटें आरक्षित हैं, कौन सा कागज़ चाहिए, और सीट आखिर मिलती कैसे है। सही जानकारी न होने से कई बार सीट सिर्फ इसलिए छूट जाती है कि कोई प्रमाणपत्र गलत या पुराना था। इस आर्टिकल में यही सब आसान हिंदी में समझाया गया है।

कौन कौन सी श्रेणियाँ होती हैं

  • General यानी सामान्य वर्ग: इसे UR भी कहते हैं।
  • OBC (नॉन क्रीमी लेयर): पिछड़ा वर्ग, जिनकी पारिवारिक आय तय सीमा से कम हो।
  • SC: अनुसूचित जाति।
  • ST: अनुसूचित जनजाति।
  • EWS: सामान्य वर्ग के वे स्टूडेंट जिनकी पारिवारिक आय तय सीमा से कम हो।
  • PwD: दिव्यांग स्टूडेंट, जिनकी दिव्यांगता तय सीमा से ज़्यादा हो।

ऑल इंडिया कोटा में आरक्षण कितना है

ऑल इंडिया कोटा (AIQ) में केंद्र सरकार का तय आरक्षण इस तरह होता है।

  • SC: 15 प्रतिशत।
  • ST: 7.5 प्रतिशत।
  • OBC (नॉन क्रीमी लेयर): 27 प्रतिशत।
  • EWS: 10 प्रतिशत।
  • PwD: 5 प्रतिशत, जो हर श्रेणी के अंदर से लागू होता है।

वर्टिकल और हॉरिजॉन्टल का आसान फर्क

SC, ST, OBC, EWS और General अलग अलग खाने की तरह होते हैं, इन्हें वर्टिकल आरक्षण कहते हैं। PwD थोड़ा अलग है, यह हर खाने के अंदर से 5 प्रतिशत निकालता है, इसे हॉरिजॉन्टल आरक्षण कहते हैं। यानी एक SC और PwD दोनों वाला स्टूडेंट, SC खाने के अंदर PwD सीट पाता है। एक और बात, EWS सिर्फ सामान्य वर्ग वालों के लिए है, SC, ST या OBC वाले EWS में नहीं आ सकते।

स्टेट कोटा का आरक्षण अलग होता है

ऊपर बताए गए प्रतिशत ऑल इंडिया कोटा के लिए हैं। 85 प्रतिशत वाले स्टेट कोटा में आरक्षण हर राज्य खुद तय करता है, और वह अलग हो सकता है। कई राज्यों के अपने खास आरक्षण भी होते हैं, जैसे महिलाओं के लिए या स्थानीय निवासियों के लिए। इसलिए अपने राज्य का सही प्रतिशत हमेशा उस साल के आधिकारिक काउंसलिंग ब्रोशर से देखिए।

कौन से कागज़ चाहिए और उनकी वैधता

  • जाति प्रमाणपत्र (SC या ST के लिए): यह आमतौर पर लंबे समय तक चलता है।
  • OBC नॉन क्रीमी लेयर प्रमाणपत्र: यह ताज़ा चाहिए, यानी उसी साल का, और AIQ के लिए केंद्र की OBC सूची वाला होना चाहिए, राज्य की सूची वाला नहीं।
  • EWS प्रमाणपत्र: यह भी उसी साल का ताज़ा चाहिए और सही केंद्रीय प्रारूप में होना चाहिए।
  • PwD प्रमाणपत्र: यह किसी भी अस्पताल से नहीं, बल्कि तय की गई अधिकृत मेडिकल बोर्ड से बनवाना होता है।

इन कागज़ों में छोटी सी चूक, जैसे पुराना प्रमाणपत्र या गलत प्रारूप, अक्सर सीट छीन लेती है। इसलिए इन्हें पहले से और सही तरीके से बनवा लीजिए।

सीट आखिर मिलती कैसे है, काउंसलिंग के राउंड

  • रजिस्ट्रेशन: पहले काउंसलिंग की वेबसाइट पर नाम दर्ज कराना और फीस भरना।
  • चॉइस भरना और लॉक करना: अपनी पसंद के कॉलेज और कोर्स क्रम से चुनना, और फिर उन्हें लॉक कर देना।
  • पहला और दूसरा राउंड: नंबर, श्रेणी और आपकी पसंद के हिसाब से सीट मिलती है। यहाँ सीट रखने, ऊपर वाले कॉलेज के लिए इंतज़ार करने जैसे विकल्प मिलते हैं।
  • मॉप अप राउंड: बची हुई सीटें, ज़्यादातर निजी और डीम्ड कॉलेजों की, इसमें भरी जाती हैं।
  • स्ट्रे वैकेंसी राउंड: सबसे आखिरी बची सीटें, जिनके नियम कड़े होते हैं।

श्रेणी की रैंक और मेरिट कैसे जुड़ती है

हर स्टूडेंट की एक कुल रैंक होती है और एक अपनी श्रेणी की रैंक। आरक्षित श्रेणियों का कट ऑफ आमतौर पर सामान्य वर्ग से नीचे रहता है, क्योंकि उनके लिए सीटें अलग से रखी जाती हैं। इसका मतलब यह नहीं कि तैयारी कम रखें, बल्कि यह कि आपकी श्रेणी के हिसाब से भी आपके पास मौके होते हैं। अगर कोई आरक्षित सीट खाली रह जाए, तो अक्सर वह नियम के अनुसार सामान्य पूल में चली जाती है।

एक ज़रूरी बात

हर साल सबसे ज़्यादा सीटें कम नंबर से नहीं, बल्कि कागज़ की गलती से छूटती हैं, जैसे पुराना OBC या EWS प्रमाणपत्र, राज्य की सूची वाला OBC जबकि AIQ के लिए केंद्र की सूची चाहिए थी, या गलत जगह से बना PwD प्रमाणपत्र। इसलिए अपनी श्रेणी के सारे कागज़ पहले से, सही प्रारूप में और उसी साल के ताज़ा बनवा लीजिए। और आरक्षण के सही प्रतिशत, खासकर स्टेट कोटा वाले, हमेशा उस साल के आधिकारिक काउंसलिंग ब्रोशर से मिलाइए, क्योंकि ये बदल सकते हैं।

अरिविहान आपकी कैसे मदद करता है

अरिविहान पर आसान हिंदी में NEET की पढ़ाई के साथ साथ आरक्षण, कागज़ और काउंसलिंग जैसी उलझन वाली बातें भी सरल भाषा में समझाई जाती हैं, ताकि नंबर आने के बाद आप किसी छोटी गलती से सीट न गँवाएँ। अच्छी तैयारी और सही जानकारी, दोनों एक साथ मिलने से आपका सफर आसान हो जाता है। मन लगाकर पढ़िए और डॉक्टर बनने का सपना पूरा कीजिए!


FAQs

यह आर्टिकल जुलाई 2026 तक उपलब्ध जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। आरक्षण के प्रतिशत, कागज़ों के नियम और काउंसलिंग की प्रक्रिया हर साल बदल सकती है, और स्टेट कोटा का आरक्षण हर राज्य में अलग होता है, इसलिए यहाँ दी गई बातें सिर्फ आसान समझ के लिए हैं। पक्की जानकारी के लिए mcc.nic.in, अपने राज्य के चिकित्सा शिक्षा विभाग की वेबसाइट और उस साल के आधिकारिक काउंसलिंग ब्रोशर को ज़रूर देखें।

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