Arivihan Logo
Ask Doubt Now !!
MPBSE

MP Board का रिजल्ट और NEET की एलिजिबिलिटी, डॉक्टर बनने के एडमिशन में असल में क्या काम आता है

Published on Jul 23, 2026 · 1 min read · 4 views
MP Board का रिजल्ट और NEET की एलिजिबिलिटी, डॉक्टर बनने के एडमिशन में असल में क्या काम आता है

MP Board का रिजल्ट और NEET की एलिजिबिलिटी, डॉक्टर बनने के एडमिशन में असल में क्या काम आता है

MP Board के बहुत से छात्र यह सोचकर परेशान रहते हैं कि 12वीं में नंबर कम आ गए तो मेडिकल में एडमिशन मुश्किल हो जाएगा। यह बात सही नहीं है। सच यह है कि MBBS में एडमिशन सिर्फ NEET के नंबर और रैंक से मिलता है, और बोर्ड का रिजल्ट सिर्फ एक शर्त पूरी करने के लिए देखा जाता है। इस आर्टिकल में साफ साफ बताया गया है कि बोर्ड का रिजल्ट कहाँ काम आता है और कहाँ नहीं।

बड़ी गलतफहमी, क्या बोर्ड के नंबर NEET की रैंक बदलते हैं

बिल्कुल नहीं। यह बात अच्छे से समझ लें, क्योंकि इसी पर बहुत से छात्र बेवजह घबराते हैं।

  • बोर्ड के नंबर NEET के 720 नंबरों में नहीं जुड़ते। आपका स्कोर सिर्फ NEET के पेपर से बनता है।
  • बोर्ड के नंबर से रैंक नहीं बदलती। मेरिट लिस्ट सिर्फ NEET के नंबरों से बनती है।
  • बराबरी होने पर भी बोर्ड के नंबर नहीं देखे जाते। दो छात्रों के NEET नंबर बराबर हों तो पहले बायोलॉजी, फिर केमिस्ट्री, फिर फिज़िक्स के नंबर देखे जाते हैं, उसके बाद यह देखते हैं कि किसके गलत जवाब कम हैं। बोर्ड के नंबर इसमें कहीं नहीं आते।
  • यानी 95 प्रतिशत वाले और 60 प्रतिशत वाले छात्र का NEET स्कोर एक जैसा हो, तो दोनों को एक जैसा ही माना जाएगा।

तो MP Board का रिजल्ट किस काम आता है, एलिजिबिलिटी की शर्तें

बोर्ड का रिजल्ट सिर्फ यह तय करता है कि आप NEET और एडमिशन के लिए एलिजिबल हैं या नहीं। इसके लिए ये शर्तें पूरी होनी चाहिए।

  • सब्जेक्ट: 12वीं में फिज़िक्स, केमिस्ट्री, बायोलॉजी या बायोटेक्नोलॉजी और अंग्रेज़ी होनी चाहिए, और इन सबमें पास होना ज़रूरी है।
  • कम से कम नंबर: फिज़िक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी तीनों को मिलाकर जनरल कैटेगरी के लिए 50 प्रतिशत, SC, ST और OBC के लिए 40 प्रतिशत, तथा जनरल कैटेगरी के दिव्यांग छात्रों के लिए 45 प्रतिशत।
  • ध्यान दें: यह प्रतिशत सिर्फ इन्हीं तीन सब्जेक्ट का जोड़ा जाता है, आपका कुल प्रतिशत या गणित के नंबर इसमें नहीं गिने जाते।
  • अंग्रेज़ी: इसमें पास होना ज़रूरी है, पर इसके नंबर उस प्रतिशत में नहीं जुड़ते।
  • उम्र: कम से कम 17 साल होनी चाहिए। ऊपर की उम्र की कोई सीमा नहीं है।
  • कितनी बार दे सकते हैं: NEET देने की संख्या पर कोई रोक नहीं है, इसलिए ड्रॉपर भी पूरी तरह एलिजिबल हैं।

एक बात और ध्यान रखें। यह 50 और 40 प्रतिशत वाली शर्त 12वीं के नंबरों की है। NEET में अलग से पास होने के लिए कट ऑफ पर्सेंटाइल भी पार करनी होती है, जो जनरल कैटेगरी के लिए 50, SC, ST और OBC के लिए 40 तथा दिव्यांग छात्रों के लिए 45 पर्सेंटाइल है। ये दोनों बातें अलग अलग हैं।

जिन सवालों में MP Board के छात्र सबसे ज़्यादा उलझते हैं

  • 12वीं में बैठे हैं और रिजल्ट नहीं आया: आप NEET का फॉर्म भर सकते हैं, पर काउंसलिंग के पहले राउंड तक 12वीं पास होना ज़रूरी है।
  • किसी सब्जेक्ट में कंपार्टमेंट आ गई: काउंसलिंग से पहले उसे पास कर लें, तब एडमिशन मिल सकता है।
  • नंबर शर्त से कम रह गए: इंप्रूवमेंट एग्ज़ाम देकर नंबर बढ़ाए जा सकते हैं, पर इसका सही नियम NTA के उस साल के इनफॉर्मेशन बुलेटिन से ज़रूर मिला लें।
  • बायोलॉजी एडिशनल सब्जेक्ट के रूप में ली: यह चलती है, NMC ने इसकी छूट दी है।
  • बहुत साल पहले 12वीं पास की: कोई दिक्कत नहीं, पुराने साल वाले भी एलिजिबल हैं।

यहाँ आपका राज्य काम आता है, MP का स्टेट कोटा

मेडिकल की सीटें दो हिस्सों में बँटती हैं। 15 प्रतिशत सीटें ऑल इंडिया कोटा की होती हैं, जिनकी काउंसलिंग MCC करता है और जिनमें किसी राज्य की शर्त नहीं होती। बाकी 85 प्रतिशत सीटें स्टेट कोटा की होती हैं, जिनकी काउंसलिंग मध्य प्रदेश में DME करता है।

  • डोमिसाइल सर्टिफिकेट ज़रूरी: मध्य प्रदेश की 85 प्रतिशत सरकारी सीटों के लिए मध्य प्रदेश का डोमिसाइल सर्टिफिकेट चाहिए।
  • बेटियों के लिए: मध्य प्रदेश में छात्राओं के लिए अलग से 30 प्रतिशत सीटें रखी जाती हैं।
  • सरकारी स्कूल वालों के लिए: जिन छात्रों ने 9वीं से 12वीं तक मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूल में पढ़ाई की है, उनके लिए 5 प्रतिशत सीटें रखी जाती हैं।

यानी आपका राज्य और डोमिसाइल एडमिशन में असर डालते हैं, पर बोर्ड के नंबर नहीं। काउंसलिंग के नियम हर साल बदल सकते हैं, इसलिए DME की वेबसाइट से ताज़ा जानकारी ज़रूर देखें।

एडमिशन में असल में क्या काम आता है

  • सबसे पहले NEET का स्कोर और रैंक, यही असली आधार है।
  • NEET की कट ऑफ पर्सेंटाइल पार करना।
  • आपकी कैटेगरी और रिज़र्वेशन।
  • डोमिसाइल और स्टेट कोटा।
  • काउंसलिंग में सोच समझकर कॉलेज भरना।
  • 12वीं की कम से कम शर्त पूरी होना और डॉक्यूमेंट का सही होना।

काउंसलिंग के समय NEET का स्कोर कार्ड, 10वीं का सर्टिफिकेट, 12वीं की मार्कशीट, कैटेगरी सर्टिफिकेट और डोमिसाइल सर्टिफिकेट जैसे डॉक्यूमेंट लगते हैं, इसलिए इन्हें पहले से तैयार रखें।

एक ज़रूरी बात

बोर्ड के नंबर शर्त से ऊपर हों तो उनके पीछे और भागने की ज़रूरत नहीं, पर बोर्ड को हल्के में भी न लें। तीन वजहें हैं, पहली यह कि सिलेबस वही NCERT वाला है जो NEET में आता है, दूसरी यह कि कम से कम नंबर की शर्त पूरी करनी ही है, और तीसरी यह कि अगर NEET में मनचाहा नतीजा न आए तो अच्छा बोर्ड रिजल्ट आगे काम आता है। साथ ही ध्यान रहे, बोर्ड के नंबरों को NEET में जोड़ने की बात अभी सिर्फ एक सुझाव है, नियम नहीं। NEET 2027 के पक्के नियम NTA का इनफॉर्मेशन बुलेटिन आने पर ही तय होंगे।

अरिविहान आपकी कैसे मदद करता है

अरिविहान पर आसान हिंदी में MP Board 12वीं और NEET, दोनों के लिए फिज़िक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी के चैप्टर वाइज़ वीडियो, NCERT आधारित नोट्स और हल किए गए सवाल मिलते हैं। एक ही चैप्टर से बोर्ड की तैयारी भी हो जाती है और NEET की भी, और कंप्यूटर पर मॉक टेस्ट देकर आप नए CBT मोड की आदत भी बना सकते हैं। मन लगाकर पढ़िए और डॉक्टर बनने का सपना पूरा कीजिए!


FAQs

यह आर्टिकल जुलाई 2026 तक उपलब्ध जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। NEET 2027 की एलिजिबिलिटी, पैटर्न और काउंसलिंग के नियम NTA, NMC तथा राज्य के काउंसलिंग बोर्ड के आधिकारिक नोटिफिकेशन से तय होंगे और इनमें बदलाव हो सकता है, इसलिए फॉर्म भरने से पहले nta.ac.in, neet.nta.nic.in, nmc.org.in, mcc.nic.in और dme.mponline.gov.in पर ताज़ा जानकारी ज़रूर जाँच लें।

Tags: MPBSE MP Board NEET

© Copyright - 2026. All right reserved to Arivihan Technologies Pvt. Ltd.