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ऑल इंडिया कोटा और स्टेट कोटा (85/15), UP, राजस्थान और MP के स्टूडेंट के लिए आसान समझ

Published on Aug 10, 2026 · 1 min read · 2 views
ऑल इंडिया कोटा और स्टेट कोटा (85/15), UP, राजस्थान और MP के स्टूडेंट के लिए आसान समझ

ऑल इंडिया कोटा और स्टेट कोटा (85/15), UP, राजस्थान और MP के स्टूडेंट के लिए आसान समझ

NEET का नंबर आने के बाद सीधे कॉलेज नहीं मिलता, पहले काउंसलिंग होती है, और यहीं पर ऑल इंडिया कोटा और स्टेट कोटा वाली बात आती है। बहुत से स्टूडेंट यह समझ ही नहीं पाते कि सरकारी सीट दो अलग रास्तों से भरती है, और सही जानकारी न होने से एक अच्छा मौका छूट जाता है। इस आर्टिकल में यही 85 और 15 का बँटवारा बहुत आसान हिंदी में समझाया गया है, खासकर UP, राजस्थान और मध्य प्रदेश के स्टूडेंट के हिसाब से।

85 और 15 का बँटवारा क्या है

हर सरकारी मेडिकल और डेंटल कॉलेज की सीटें दो हिस्सों में बँटती हैं। 15 प्रतिशत सीटें ऑल इंडिया कोटा (AIQ) में जाती हैं, जिनके लिए पूरे देश का कोई भी NEET पास स्टूडेंट लड़ सकता है, चाहे वह किसी भी राज्य का हो। बाकी 85 प्रतिशत सीटें स्टेट कोटा में जाती हैं, जो उसी राज्य के मूल निवासी (डोमिसाइल वाले) स्टूडेंट के लिए होती हैं। यानी अपने ही राज्य में सबसे ज़्यादा सीटें आपके लिए स्टेट कोटा में होती हैं।

ऑल इंडिया कोटा (AIQ) में क्या क्या आता है

AIQ की काउंसलिंग MCC नाम की केंद्रीय संस्था कराती है, और इसमें डोमिसाइल की ज़रूरत नहीं होती। इसमें ये सीटें आती हैं।

  • हर सरकारी कॉलेज की 15 प्रतिशत सीटें, चाहे वह किसी भी राज्य में हो।
  • डीम्ड यूनिवर्सिटी की सारी सीटें।
  • केंद्रीय यूनिवर्सिटी के कॉलेज, जैसे दिल्ली, बनारस और अलीगढ़ वाले।
  • AIIMS और JIPMER के सारे कैंपस।
  • ESIC के कॉलेज।

स्टेट कोटा (85 प्रतिशत) और डोमिसाइल की बात

स्टेट कोटा की काउंसलिंग हर राज्य खुद कराता है, और इसके लिए उस राज्य का डोमिसाइल यानी मूल निवास ज़रूरी होता है। डोमिसाइल का मतलब है कि आप उस राज्य के असली निवासी माने जाते हैं, या तो जन्म और निवास से, या इसलिए कि आपने वहीं से पढ़ाई की है। हर राज्य के अपने नियम होते हैं, और वही आपके स्टेट कोटा में लड़ने का हक तय करते हैं।

तीनों राज्यों के नियम, आसान भाषा में

  • उत्तर प्रदेश: यहाँ सरकारी कॉलेज की स्टेट कोटा सीट के लिए UP का डोमिसाइल चाहिए। आमतौर पर जिन स्टूडेंट ने 10वीं और 12वीं दोनों UP से की हैं, उन्हें अलग से डोमिसाइल बनवाने की ज़रूरत नहीं पड़ती। जिनके माता पिता UP के मूल निवासी हैं पर पढ़ाई बाहर से हुई, उन्हें वैध डोमिसाइल देना होता है। UP का डोमिसाइल न होने पर सिर्फ यहाँ के निजी कॉलेजों में मौका रहता है।
  • राजस्थान: यहाँ स्टेट कोटा के लिए राजस्थान का मूल निवास चाहिए, जो आमतौर पर लंबे समय (करीब 10 साल) के निवास पर मिलता है, या माता पिता के राजस्थान में सरकारी नौकरी में होने जैसी शर्तों पर। पढ़ाई राजस्थान से होने पर दावा आसान हो जाता है।
  • मध्य प्रदेश: यहाँ भी स्टेट कोटा सीट के लिए MP का डोमिसाइल ज़रूरी है, और आमतौर पर 10वीं तथा 12वीं MP से पढ़ी होने पर दावा मजबूत रहता है। डोमिसाइल न होने पर सरकारी स्टेट कोटा सीट नहीं, सिर्फ निजी कॉलेजों तक मौका सीमित रहता है।

ध्यान रहे, ये नियम अंदाज़न हैं और हर साल थोड़े बदल सकते हैं। पक्की बात हमेशा उस साल के आधिकारिक काउंसलिंग ब्रोशर से ही तय होगी।

दो अलग काउंसलिंग, दोनों को समझ लीजिए

  • AIQ की काउंसलिंग: MCC कराता है, वेबसाइट mcc.nic.in। यहाँ अलग से रजिस्ट्रेशन होता है।
  • UP की स्टेट काउंसलिंग: राज्य का चिकित्सा शिक्षा विभाग कराता है।
  • राजस्थान की स्टेट काउंसलिंग: राज्य का मेडिकल एजुकेशन विभाग कराता है।
  • MP की स्टेट काउंसलिंग: DME मध्य प्रदेश, MP Online के ज़रिए कराता है।

एक ही कॉलेज की AIQ वाली और स्टेट कोटा वाली सीट का कट ऑफ अलग अलग हो सकता है, इसलिए दोनों जगह की स्थिति अलग से देखिए।

क्या दोनों में एक साथ आवेदन कर सकते हैं

हाँ, और यही समझदारी है। आप MCC वाली AIQ काउंसलिंग और अपने राज्य की स्टेट काउंसलिंग, दोनों में एक साथ रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं। इससे आपके पास ज़्यादा कॉलेज और ज़्यादा मौके रहते हैं। बस एक बात याद रखिए, एक समय पर एक ही सीट रखी जा सकती है। अगर दोनों जगह सीट मिल जाए, तो एक चुनकर दूसरी नियम के हिसाब से छोड़नी होती है।

डोमिसाइल कैसे साबित होता है

डोमिसाइल यानी मूल निवास प्रमाणपत्र राज्य सरकार का दफ्तर (जैसे तहसील) बनाता है। कई राज्यों में उसी राज्य से 10वीं और 12वीं पास होना ही पर्याप्त माना जाता है। एक ज़रूरी बात, डोमिसाइल सिर्फ एक ही राज्य का बनवाया जा सकता है, दो राज्यों का बनवाना गलत है। यह प्रमाणपत्र बनने में समय लगता है, इसलिए इसे नंबर आने का इंतज़ार किए बिना, पहले से बनवाना शुरू कर दीजिए।

एक ज़रूरी बात

डोमिसाइल और बाकी ज़रूरी कागज़ पहले से तैयार रखिए, क्योंकि काउंसलिंग के समय सबसे ज़्यादा सीटें कम नंबर से नहीं, बल्कि कागज़ अधूरे रह जाने से छूटती हैं। दूसरी बात, AIQ और अपने राज्य, दोनों की काउंसलिंग में रजिस्ट्रेशन कीजिए, ताकि मौके ज़्यादा रहें। और सबसे ज़रूरी, हर राज्य के नियम अलग और हर साल थोड़े बदलते रहते हैं, इसलिए अंतिम फैसला हमेशा उस साल के आधिकारिक काउंसलिंग ब्रोशर से ही मिलाइए।

अरिविहान आपकी कैसे मदद करता है

अरिविहान पर आसान हिंदी में NEET की पढ़ाई के साथ साथ काउंसलिंग, कोटा और डोमिसाइल जैसी ज़रूरी बातें भी सरल भाषा में समझाई जाती हैं, ताकि नंबर आने के बाद आप उलझन में न पड़ें। सही जानकारी और अच्छी तैयारी, दोनों एक ही जगह मिलने से आपका रास्ता आसान हो जाता है। मन लगाकर पढ़िए और डॉक्टर बनने का सपना पूरा कीजिए!


FAQs

यह आर्टिकल जुलाई 2026 तक उपलब्ध जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। कोटा, डोमिसाइल और काउंसलिंग के नियम हर राज्य में अलग होते हैं और हर साल बदल सकते हैं, इसलिए यहाँ दी गई बातें सिर्फ आसान समझ के लिए हैं। अंतिम और पक्की जानकारी के लिए mcc.nic.in, अपने राज्य के चिकित्सा शिक्षा विभाग की वेबसाइट और उस साल के आधिकारिक काउंसलिंग ब्रोशर को ज़रूर देखें।

Tags: RBSE UPMSP MPBSE NEET

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